news-details

वोटरलिस्ट से नाम हटने के मुद्दे पर मायावती ने जताई चिंता, उत्तराखंड चुनावी तैयारियों की समीक्षा

You can share this post!

 

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को लखनऊ स्थित सेंट्रल कैंप कार्यालय में उत्तराखंड के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में बसपा की ओर से दावा किया गया कि एसआईआर पुनरीक्षण के बाद उत्तराखंड की मतदाता सूची से करीब नौ लाख नाम हटाए गए हैं। मायावती ने कहा कि गरीब, युवा, महिला और कमजोर वर्ग के लोगों को उनके संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पदाधिकारियों को ऐसे पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए लगातार प्रयास करने के निर्देश दिए।मायावती ने उत्तराखंड सरकार की कार्यशैली पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार गरीबों और आम जनता के हितों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है और उसका झुकाव बड़े पूंजीपतियों के हितों की ओर अधिक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इन मुद्दों को जनता के बीच प्रमुखता से उठाने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया।बैठक में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बूथ स्तर तक पार्टी की कमेटियों के पुनर्गठन की प्रगति की समीक्षा की गई। मायावती ने कमेटियों के गठन की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही संभावित मजबूत उम्मीदवारों के चयन और चुनावी तैयारियों को लेकर भी पदाधिकारियों से जानकारी ली गई।बैठक में बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम की नौ अक्टूबर को होने वाली पुण्यतिथि के कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा हुई। मायावती ने कहा कि कांशीराम की पुण्यतिथि मिशनरी भावना के साथ मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि यूपी-दिल्ली सीमा स्थित बहुजन प्रेरणा केंद्र में रखरखाव का सरकारी कार्य चलने के कारण इस वर्ष वहां कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।मायावती के अनुसार, इस बार उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों से बसपा कार्यकर्ता और समर्थक लखनऊ पहुंचकर मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे। वहीं, अन्य राज्यों में जोन स्तर पर संगोष्ठियों का आयोजन कर कांशीराम के विचारों और उनके सामाजिक आंदोलन में योगदान को याद किया जाएगा। बैठक के दौरान मायावती ने संगठन को चुनावी स्तर पर मजबूत करने और जमीनी मुद्दों को जनता तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।